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अमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स सोसाईटी, जयपुर |
10/22/09 |
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अमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स सोसाईटी (आस), जयपुर के वेबपेज पर आपका
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हमारी संस्था खगोल विज्ञान में रूचि रखने वाले समस्त आमजनों को एक आधार उपलब्ध कराती है। जयपुर शहर की खगोल सम्बन्धी प्राचीन परम्परा का पुनरावलोकन करना हमारी संस्था का सतत् प्रयास है। महाराजा सवाई जयसिंह-द्वितीय द्वारा निर्मित करवाई गई वेधशाला, जिसमें विश्व की मानव-निर्मित सबसे विशाल सूर्य-घड़ी स्थित है, में स्थापित विशाल खगोल यन्त्र आज भी यथावत् खड़े हैं परन्तु आज इन यन्त्रों एवं इनके आधुनिक रूपों का उपयोग एवं अध्ययन करने की अदम्य आकांक्षा वाले व्यक्तियों की नितान्त आवश्यकता है। हमारी संस्था के सदस्य टेलिस्कोप निर्माण, खगोलीय घटनाओं की फोटोग्राफी, समय-समय पर प्रारम्भिक खगोल विज्ञान सम्बन्धी अध्यापन करने के साथ-साथ जयपुर शहर में तथा इसके आस-पास के क्षेत्र में अपने उपकरणों द्वारा रात्रि आकाश का अध्ययन भी करते हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य आमजनों में खगोल विज्ञान के सम्बन्ध में जागरूकता उत्पन्न करना तथा खगोलीय घटनाओं के सम्बन्ध में व्याप्त भ्रान्तियों को दूर करने के प्रयास के साथ-साथ इस विषय का प्रचार-प्रसार करना है। आईये हम आपका परिचय खगोल विज्ञान से करवाऐं। इसके लिए हमें अपने स्वयं के निवास यानि पृथ्वी से ही आरम्भ करना होगा। पृथ्वी हमारे सौरमण्डल का अपने तारे अर्थात सूर्य से तीसरा ग्रह है। तो सर्वप्रथम हम सौरमण्डल से आरम्भ करते हैं।
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This site was last updated 10/22/09